शनिवार, 29 मार्च 2014

यज्ञोपवीत महिमा

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजपतेर्यत्सहजं पुरस्तात् |
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेज:|
यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपनह्यामि ||

पारस्कर गृहसूत्र २/२/१०  

यज्ञोपवीत महिमा
तर्ज :-  ऐ दिल जरा संभल जा शायद वह आ गया है |
यज्ञोपवीत लेकर खुद को निहारना है |
जीवन सुधारने का संकल्प धारना है | जीवन .....
हर झूठ की तरफ से मुहं अपना फेरना है |
सच्चे व्रतों का पालन करने की प्रेरणा है |
ताप त्याग साधना को हरदम उभारना है | जीवन .....
गायत्री जाप संध्या स्वाध्याय यज्ञ करना |
दुष्टों की संगति में हरगिज न पाँव धरना |
भगवान को कभी न दिल से बीसारना है | जीवन ....
समझो ये तीन ऋण हैं, कंधे पे तीन धागे |
जब तक हैं प्राण इन से व्यक्ति कभी न भागे |
माता पिता गुरु के ऋण को उतारना है | जीवन ....
पितरों की टहल सेवा देवों की उचित पूजा |
ऋषियों के संग जैसा कर्तव्य है न दूजा |
निष्कपट स्वच्छ सुन्दर जीवन गुजारना है | जीवन...
नेकी के काम करके फल की न चाह लाना |
निष्काम भाव होकर औरों के काम आना |
शिक्षा का सूत्र है यह मन में विचारना है | जीवन ...
शुभ चिह्न आर्यों का यज्ञोपवीत है यह |
सब श्रेष्ठ लोग पहनें ऋषियों की रीत है यह |
दुनियाँ में “पथिक” इस के यश को निखारना है | जीवन ....

(साभार :- “पथिक” भजन संग्रह भाग २, रचयिता :- पण्डित सत्यपाल जी “पथिक” अमृतसर, प्रकाशक :- आर्य प्रकाशन, दिल्ली)

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