तेरे पूजन को भगवान्, बना मन-मंदिर
आलीशान
किसने देखी तेरी माया
किसने भेद तेरा है पाया
ऋषि-मुनि हारे कर ध्यान, बना.....|
किसने देखी तेरी सूरत
कौन बनावे तेरी मूरत
तू है निराकार भाग्वान्, बना ......|
यह संसार है तेरा मंदिर
तू रमा है इस के अन्दर
करते ऋषि-मुनि सब ध्यान, बना .....|
तू हर गूल में, तू बुलबुल में
तू हर शाख में, तू हर पात में
तू हर दिल में प्रभु को मान, बना ....|
तू ही वन में, तू ही मन में
तेरा रूप अनूप महान्, बना .....|
तू ने राजा रंक बनाए
तूने भिक्षुक राज बिठाए
तेरी लीला इश महान्, बना .... |
झूठे जग के झूठी माया
मुर्ख इसमें क्यों भरमाया
कर कुछ जीवन का कल्याण , बना ...|
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