शनिवार, 29 मार्च 2014

सुनो हे प्रभु जी ! यह विनती हमारी |

तर्ज :- परदेसियों से न अखियाँ मिलाना

सुनो हे प्रभु जी ! यह विनती हमारी |
पिता हम खड़े हैं शरण में तुम्हारी |
तू ही एक दाता है दुनियाँ का मालिक
सभी तेरे बच्चे सभी तेरे बालक |
तू है सर्व व्यापक कुशल न्यायकारी |
सुनो हे प्रभु जी ! यह विनती हमारी |
प्रभु निज दया का यह उपहार देना |
हमें सत्य विद्या का भण्डार देना |
सदा सत्य के ही रहें हम पुजारी |
सुनो हे प्रभु जी  ! यह विनती हमारी |
प्रभो गुण तुम्हारे हे गायें सदा हम |
सिर्फ नाम तेरा ही ध्याये सदा हम |
‘पथिक’ वंदना हम करें प्यारी प्यारी |

सुनो हे प्रभु जी यह विनती हमारी |

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