शनिवार, 29 मार्च 2014

हम कभी माता पिता का ऋण चुका सकते नहीं |

हम कभी माता पिता का ऋण चुका सकते नहीं |
इन के तो एहसान हैं इतने गिना सकते नहीं |
यह कहाँ पूजा में शक्ति यह कहाँ फल जाप का |
हो तो हो इन की कृपा से खात्मा संताप का |
इन की सेवा से मिले धन ज्ञान बल लम्बी उमर ,
स्वर्ग से बढ़ कर है जग में आसरा माँ बाप का |
इन की तुलना में कोई वस्तु भी ला सकते नहीं |
हम कभी माता-पिता का ऋण चुका सकते नहीं |
देख लें हम को दु:खी तो भर लें अपने नैन ये |
एक हमारे सुख की खातिर तड़पते दिन रैन ये |
भूख लगती प्यास न और नींद भी आती नहीं,
कष्ट हो तन पे हमारे हो उठें बेचैन ये |
इन से बढ़ कर देवता भी सुख दिला सकते नहीं |
हम कभी माता-पिता का ऋण चुका सकते नहीं |
पढ़ लो वेद और शास्त्र का ही एक यह मर्म है |
योग्यतम सन्तान का यह सब से उत्तम कर्म है |
जगत में जब तक जिए सेवा करे माँ बाप की |
इन के चरणों में यह तन मन धन लुटाना धर्म है |
यह ‘पथिक’ यह सत्य है जिस को झूठा सकते नहीं |

हम कभी माता-पिता का ऋण चुका सकते नहीं |

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