जननी जन्म भूमि स्वर्ग से महान है |
इसके लिए तन है मन है धन है और प्राण
है
तन मन धन प्राण हैं |
इसके कण-कण में लिखा रामकृष्ण नाम है |
हुतात्माओं के रुधिर से भूमि शस्य
श्याम है |
धर्म का यह धाम है सदा इसे प्रणाम है |
स्वतन्त्र है धरा यहाँ स्वतन्त्र आसमान
है ||
इसकी गोद में हजारों गंगा जमुना झूमती
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इसके पर्वतों की चोटियां गगन को चूमती
भूमि यह महान है निराली इसकी शान है |
इसकी विजय पताका पर विजय का निशान है
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इसकी आन पर अगर जो कोई बात आ पड़े |
इसके सामने जो जुल्म का पहाड़ हों खडें
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शत्रु सब जहान हों विरुद्ध आसमान हो |
मुकाबला करेंगे हम जान में यह जान हैं
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